EPF VS PPF

EPF और PPF के बीच अंतर जानें – ईपीएफ VS पीपीएफ

जब भी निवेश का नाम आता है तो दो फाइनेंशियल टर्म्स ईपीएफ(EPF) और पीपीएफ(PPF) दोनों का ही फिक्र जरूर होता है। नाम में लगभग एक समान होने के कारण निवेदक अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं। कभी-कभी तो इनका नाम इंटरचेंज करके इस्तेमाल करते हैं। पर वास्तविकता में दोनों एक दूसरे से भिन्न है। बिस्तर में जानते हैं की ईपीएफ तथा पीपीएफ क्या है, और उनके बीच क्या अंतर है। 

एम्पलाई प्रोविडेंट फंड (EPF) क्या है

 एम्पलाई प्रोविडेंट फंड (Employee Provident fund) यानी एप जैसे आमतौर पर जीएफ भी कहा जाता है। यह एक स्कीम है जो सैलेरी पर्सन को रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल बेनिफिट प्रोवाइड करती है। यह स्कीम एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन अर्थात ईपीएफओ के द्वारा चलाई जाती है। 

कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की तनख्वाह कई हिस्सों में बाटी होती है, इनमें से एक हिस्सा बेसिक सैलरी का होता है। कर्मचारी कि बेसिक सैलरी में  से हर महीने 12% रुपया काटकर ईपीएफ के खाते में डाल दिया जाता है। इसी खाते में कंपनी भी अपनी तरफ से इतना ही अर्थात सरकारी की सैलरी का 12% अमाउंट ईपीएफ अकाउंट में डालती है। कर्मचारी अपनी सैलरी से 12% से अधिक पैसा भी कटवा सकते हैं किंतु कंपनी अपने योगदान को बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं होती है।

यह पैसा कर्मचारियों को तब वापस मिलता है जब वह रिटायर होता है या फिर रिजाइन करता है। यदि कर्मचारी एक कंपनी छोड़कर किसी दूसरी कंपनी में नौकरी ज्वाइन करता है तो वह अपनी पिछली कंपनी का ईपीएफ अकाउंट अगली कंपनी में भी ट्रांसफर कर सकता है। जरूरत पड़ने पर अकाउंट होल्डर पीएफ अकाउंट के आधार पर लोन भी प्राप्त कर सकते हैं। यदि किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके पीएफ अकाउंट में जमा पैसे कर्मचारी के नामित किए गए व्यक्ति को दिए जाते हैं। 

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) क्या है?

 पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public Provident Fund) केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक स्कीम है। कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय बैंक या फिर पोस्ट ऑफिस में पीपीएफ अकाउंट खोल सकते है इसके लिए उन्हें किसी कंपनी का एम्पलाई होना जरूरी नहीं है अर्थात नीचे पेशावर व्यक्ति भी पीपीएफ अकाउंट खुलवा सकते है। इस अकाउंट में व्यक्ति को हर साल कम से कम ₹500 जमा करने होते हैं तथा ज्यादा से ज्यादा जमा करने की लिमिट ₹70000 है। 

पीपीएफ (PPF) खाते में जमा की गई रकम का लॉक एंड पीरियड 15 वर्ष का होता है अर्थात आपने जिस वित्तीय वर्ष में पीपीएफ अकाउंट खुलवाया है, उसके 15 साल आज आप अपनी सारी रकम निकाल सकते हैं। शिक्षा विशाल तक के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। इन 5 वर्षों में अकाउंट होल्डर इंटरेस्ट कमा कर सकते हैं और खाते में नहीं रकम भी जोड़ सकते हैं। अकाउंट होल्डर पीपीएफ अकाउंट से कुछ पैसा निकाल सकते हैं किंतु पूरा पैसा मैच्योरिटी से पहले नहीं निकाला जा सकता। जैसे-जैसे खाता खोलने के बाद समय अवधि बढ़ती जाती है पैसा निकालने की लिमिट भी बढ़ती जाती है उदाहरण के तौर पर 6 वर्ष पूरे होने के बाद अकाउंट होल्डर 60% अमाउंट विड्रा कर सकते है। 

ईपीएफ और पीपीएफ के बीच का अंतर 

उपरोक्त व्याख्यान से ये तो साफ हो गया की ईपीएफ और पीपीएफ दोनों ही निवेश के ऑप्शंस जरूर है पर दोनो एक दूसरे से पूरी तरह भिन्न है। आइए अब विस्तार में तबुलर फॉर्मेट में इनके अंतर को जानते है। 

परिमापपीपीएफ (PPF)ईपीएफ (EPF)
योग्यता कोई भारतीय नागरिक पीएफ में इन्वेस्ट कर सकता है किंतु एनआरआई नहीं कर सकतेइपीएफ एक्ट के अंदर रजिस्टर्ड कंपनी के वेतनवर्ती कर्मचारी ही केवल ईपीएफ अकाउंट के लिए एलिजिबल होते है।
निवेश रकम किसी भी फिसकल ईयर में न्यूनतम ₹500 तथा अधिकतम रुपए 150000 की राशि इन्वेस्ट की जा सकती हैअनिवार्य तौर पर सैलरी का 12% ही जमा किया जा सकता है। इसके अलावा एम्पलाई तथा एंपलॉयर के बीच के एग्रीमेंट के बेसिस पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है
समयावधि पीपीएफ अकाउंट की समय अवधि 15 साल है जिसे 5 साल तक के लिए बढ़ाया भी जा सकता हैनौकरी छोड़ते वक्त कर्मचारी परमानेंटली इपीएफ अकाउंट को बंद भी कर सकता है या इसे अगली कंपनी में ट्रांसफर भी कर सकता है। 
ब्याज दर7.1%8.50%
योगदानकर्ता स्वयं अथवा माता पिता यदि अकाउंथोल्डर माइनर हो तो कर्मचारी तथा नियोक्ता 
टैक्स बेनिफिट पीपीएफ अकाउंट में किया गया योगदान क्षेत्र 80c के तहत कर्कवती योग्य है तथा परिपक्वता राशि टैक्स फ्री है।ऐप में किया गया योगदान कर कटौती योग्य है तथा न्यूनतम 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के बाद परिपक्वता राशि कर मुक्त है। 
गवर्निंग एक्ट सरकारी बचत बैंक अधिनियम, 1873 (पूर्व में सार्वजनिक भविष्य निधि अधिनियम, 1968)कर्मचारी भविष्य निधि तथा विविध प्रावधान अधिनियम,, 1952

निष्कर्ष 

ईपीएफ और पीपीएफ दोनों ही निवेश के लिए प्रसिद्ध विकल्प है जो कि व्यक्ति को लंबे समय के लिए बचत तथा कर लाभ प्रदान करते हैं। दोनों ही प्रकार अकाउंट सुनिश्चित रिटर्न तथा फोन ट्रांसफर करने के विकल्प प्रोवाइड करते हैं। दोनों ही अकाउंट की तुलना करके आपको काफी हद तक दोनों के बीच का अंतर तथा समानताएं समझ आ चुकी होगी। अब निवेश से पहले आप ऊपर दिए हुए कारकों का सावधानीपूर्वक आकलन करें तथा तथा अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, बेयरिंग कैपेसिटी हो कंसीडरेशन में रखते हुए उसे योजना को चुने जो आपकी वित्तीय आवश्यकताओं पर पूर्णतः खरी उतरे तथा आपको लाभ प्रदान करें। 

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